ग्लासगो: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए 31 जुलाई का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। डेकाथलॉन स्पर्धा में तेजस्विन शंकर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। उन्होंने कुल 7976 अंक हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया और इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बनकर इतिहास रच दिया।
डेकाथलॉन में पहली बार भारत को मिला पदक
डेकाथलॉन एथलेटिक्स की सबसे चुनौतीपूर्ण स्पर्धाओं में गिनी जाती है, जिसमें 10 अलग-अलग प्रतियोगिताओं में प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाते हैं। अंतिम स्पर्धा 1500 मीटर दौड़ के बाद तेजस्विन के कुल 7976 अंक हुए, जिसके साथ उन्होंने कांस्य पदक सुनिश्चित किया। खास बात यह रही कि पैर में चोट के कारण वह अपने पसंदीदा हाई जंप इवेंट में हिस्सा भी नहीं ले सके थे।
क्रिकेटर बनने का था सपना
21 दिसंबर 1998 को दिल्ली में जन्मे तेजस्विन शंकर बचपन में क्रिकेटर बनना चाहते थे। पारिवारिक माहौल भी क्रिकेट के अनुकूल था, लेकिन पिता के निधन के बाद परिस्थितियां बदल गईं। स्कूल के दौरान सरदार पटेल विद्यालय के फिजिकल एजुकेशन शिक्षक ने उन्हें एथलेटिक्स अपनाने की सलाह दी और यही फैसला उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट बन गया।
16 साल की उम्र में तोड़ा राष्ट्रीय रिकॉर्ड
महज 16 वर्ष की उम्र में तेजस्विन ने 2.18 मीटर की हाई जंप लगाकर हरि शंकर रॉय का 12 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस उपलब्धि के दम पर उन्हें अमेरिका की कैनसस स्टेट यूनिवर्सिटी में स्पोर्ट्स स्कॉलरशिप मिली। वर्ष 2018 में उन्होंने 2.29 मीटर की छलांग लगाकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया, जो अब भी उनके नाम दर्ज है।
2022 के बाद 2026 में फिर चमके तेजस्विन
तेजस्विन शंकर ने इससे पहले बर्मिंघम में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में हाई जंप स्पर्धा में 2.22 मीटर की छलांग लगाकर कांस्य पदक जीता था। वह हाई जंप में कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बने थे। अब ग्लासगो 2026 में डेकाथलॉन में कांस्य जीतकर उन्होंने अपने नाम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज कर ली।
भारत के पदकों की संख्या पहुंची 23
31 जुलाई के मुकाबलों के बाद भारत के खाते में कुल 23 पदक हो चुके थे। जूडो में दो स्वर्ण सहित कई पदक जीतने के साथ-साथ तेजस्विन शंकर की ऐतिहासिक सफलता ने भी भारतीय दल के प्रदर्शन को नई ऊंचाई दी।
